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Wednesday, 9 May 2012

Old Diary 4.....

My Old diary strikes again:

गुजरे पल .....                                                       (Apr,2001)

यह ख्याल अनजाने ही दिल में आता है,
बीते दिनों में लौट जाऊं यही तो जी चाहता है....
तन्हाई में उन दिनों की याद सताती है कभी- कभी,
जब हम दोनों थे एक दूजे के लिए अजनबी .....
शख्शियत तुम्हारी और बेहतरी से समझना चाहते थे,
और इसी कोशिश में और भी करीब आ जाते ...
कुछ कशिश, कुछ कसक, कुछ तड़प , कुछ झिझक ,
कुछ हंसी, कुछ शर्म , कुछ अदा, कुछ भरम ....
अनकहे ही सारी बातें हमारे बीच कही जाती ,
साथ गुजरे उन लम्हों की याद आज भी दिल को छू कर जाती।.....

पर आज, 
जब हम दोनों ही एक खुली किताब बन चुके है,
करीब रहकर भी लगता है कोसों दूर जा चुके है....
दुनियादारी की तराजू में अब रिश्तो को तोलने लगे है,
फायदा हुआ की नुक्सान यह हिसाब जोड़ने लगे है......
बेहतर तो था वो वक़्त,वो ज़माना जो अब भी याद आता है...
फिर से दोनों का दिल अजनबी बन जाना चाहता है।......

Tuesday, 17 April 2012

Old Diary 3......

After the previous two excerpts, Old Diary again....


कोई अपना सा......                                             (Dec 2002)


हवाओं के किसी कोने से ,
     उसने मुझे आवाज़ लगाया...
अपनी बाहें फैलाकर, 
     उसने मुझे पास बुलाया....
आहिस्ता मेरे गालो को सहलाकर,
     वो दो बोल प्यार के सुनाया....
और मेरी आँखों में ऑंखें डालकर,
      कुछ ऐसा जादू चलाया ......
एक ही पल में इतना कुछ हो गया,
      की मुझे खुद को संभालना भी न आया.....
फिर धीरे से मेरे होठों को छूकर ,
      उसने मुझे गले लगाया....
अब कहने को और क्या बाकि रहा,
      जब 'मौत' ने मुझे अपना बनाया........





Tuesday, 3 April 2012

Old Diary 2....

Another excerpt from my old diary:

साहिल...                     (Sept 2001)

आज खुद को आईने में देखा तो,
 यूँ ही उस 'साहिल' का ख्याल आ गया......
       जो बरसो से तनहा खड़ा,
अपनी ठहरी हुई ज़िन्दगी के पल गिनता है ....
लहरें उसके पास आती तो है, पर अगले ही पल,
       उसे तनहा छोड़ वापस लौट जाती.....
 अक्सर लोग भी आते,
      समंदर की खूबसूरती को निहारते,
कुछ देर उसकी चट्टानों पर बैठते,
     और दिन ढलते ही वापस लौट जाते,
और वो 'साहिल' फिर से अकेला हो जाता....

समंदर के पानी पर जब,
   रात की काली परछाइयाँ लहराती,
तब भी वो 'साहिल',
सूनेपन की चादर ओड़े,
    सिमटा सा, सहमा सा खड़ा रहता....
न जाने उसे किसका इंतज़ार है ,
    शायद वो खुद भी नहीं जानता,
पर सदियों से बस इंतज़ार करता है,
   सिर्फ इंतज़ार......

Monday, 19 March 2012

Old Diary....

Just found some old diaries in my closet......I had the habit of writing diary during my school & college days, not everyday but whenever I had something to 'get out of my system' (borrowing this term from R'Mom).

While reading them, I just slipped back to memory lane....although time, situation & circumstances has changed so much, so many people who has captured the pages of my diary might not be in contact with now, but still it feels nice while reading them.

Apart from writing my heart out, in one of those diaries I used to scribble verses in Hindi (Although I always scored low in Hindi, but does that stop anyone from showing off their poetic skills!!). Thought of sharing few verses which I penned long back. I would not bore people with all in one go but one in one post.


ज़िन्दगी...                                  (Feb'2001)

एक थी 'ज़िन्दगी',
         हसीन, खुबसूरत सी.....
हर पल एक नया रंग दिखाती,
हर लम्हा एक नए अंदाज़ में आगे बदती
          एक थी 'ज़िन्दगी'.....
कभी खुशियों का था आलम,
         कभी अश्कों से थी आँखे नम,
थोड़ी ख़ुशी, थोडा गम,  यही तो थी 'ज़िन्दगी'......
         कभी अपने तेज़ रफ़्तार से सबको पीछे छोड़ देती,
कभी अपने ठहराव से बोझिल सी बन जाती,
         कभी रूकती, कभी चलती, यही तो थी 'ज़िन्दगी'......

वहीँ कहीं पर 'मौत' खड़ा था,
           'ज़िन्दगी' का दीवाना......
चाहता था 'ज़िन्दगी' को अपनी बाँहों में समेट लेना,
वैसे तो 'ज़िन्दगी' और 'मौत' की कई बार मुलाकातें हुई थी,
पर 'ज़िन्दगी' तो अपनी ही धुन में
            'मौत' को अनदेखा कर आगे बढ गयी थी......
'मौत' को यकीन था कि उसकी मोहब्बत रंग लाएगी
'ज़िन्दगी' एक न एक दिन भाग कर उसके पास चली आएगी...

और, हुआ भी यही..
'ज़िन्दगी' 'मौत' की चाहत को न टाल पाई,
'मौत' अपनी बाहें फैलाये खड़ा था
         'ज़िन्दगी' उसकी आगोश में समां गयी......
इस तरह खत्म हुआ 'ज़िन्दगी' का वजूद
     'मौत' ने उसे अपना नाम जो दे दिया था .....